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लखनऊ के राजभवन, राज्यपाल के आधिकारिक निवास ने अपनी बहुप्रतीक्षित वार्षिक पुष्प, सब्जी और फल प्रदर्शनी के लिए अपने द्वार जनता के लिए 7 फरवरी से 9 फरवरी (सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच) तक खोल दिए। पुष्प प्रदर्शनी के नाम से लोकप्रिय, वर्ष में एक बार होने वाले इस आयोजन का निवासियों द्वारा बेसब्री से इंतजार किया जाता है, जिसमें विषय-वस्तु आधारित पुष्प सज्जा, कलात्मक सजावट और फलों तथा सब्जियों का प्रभावशाली प्रदर्शन होता है. यह शहर में किसी अन्य से अलग अनुभव होता है! इस वर्ष, प्रयागराज में भव्य महाकुंभ मेला 2025 के आयोजन के साथ, लखनऊ के पुष्प शो ने एक लुभावनी श्रद्धांजलि के माध्यम से इस पवित्र आयोजन की भावना को अपनाया। महाकुंभ की पौराणिक उत्पत्ति का एक शानदार पुष्प चित्रण प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रहा। जीवंत फूलों से पूरी तरह से तैयार की गई एक राजसी संरचना पौराणिक समुद्र मंथन को जीवंत करती हुई दिखी । इस आयोजन के केन्द्र में, राष्ट्रीय ध्वज के ठीक सामने, भगवान गणेश की एक विशाल पुष्प मूर्ति भव्य रूप से स्थापित की गई।आध्यात्मिक माहौल को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए, अयोध्या के राम मंदिर की अद्भुत पुष्प प्रतिकृतियां और एक विशेष हेरिटेज पुष्प द्वीप प्रदर्शनी की खूबसूरती से शोभा बढ़ा रहे थे।
लखनऊ के समृद्ध इतिहास का जश्न मनाते हुए, प्रतिष्ठित हुसैनाबाद घंटाघर की एक लुभावनी पुष्प प्रतिकृति, शहर की स्थापत्य कला की भव्यता को श्रद्धांजलि अर्पित करती दिखी। लखनऊ विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग ने सौरमंडल का एक मनमोहक पुष्प चित्रण तैयार किया, जो सूर्य और आठ ग्रहों के बारे में जानकारी प्रदान करता था। आध्यात्मिक और स्थापत्य-थीम वाली व्यवस्थाओं के अलावा, आगंतुकों का स्वागत रंग-बिरंगे ढांचों की एक रमणीय श्रृंखला द्वारा किया गया, जिन्हें कलात्मक रूप से विभिन्न जानवरों और पक्षियों के आकार में बनाया गया, जो इस आयोजन में एक विचित्र आकर्षण जोड़ते रहे। मध्यकाल से ही भारत में मसालों की समृद्ध विरासत रही है, जो इस साल के आयोजन में मुख्य आकर्षण रहा। इस विरासत का सम्मान करने के लिए, विभिन्न राज्यों के मसालों का उपयोग करके देश का एक शानदार नक्शा तैयार किया गया, जो इसे प्रदर्शनी के सबसे आकर्षक आकर्षणों में से एक बना अंत में, प्रदर्शनी में किसानों द्वारा सावधानीपूर्वक आयोजित फलों और सब्जियों की समृद्ध विविधता पर भी प्रकाश डाला गया। इस वर्ष, कई स्टॉल पर देशी, संकर और विदेशी उत्पादों की एक प्रभावशाली श्रृंखला प्रदर्शित की गई, जो आगंतुकों को क्षेत्र की कृषि विरासत की एक झलक प्रदान कर गयी। कुल मिलाकर, तीन दिवसीय वार्षिक पुष्प, सब्जियां और फल प्रदर्शनी हर साल की भांति इन वर्ष भी लखनऊ के सबसे पसंदीदा आयोजनों में से एक रही।
लखनऊ को मिला एक और ईको पर्यटन स्थल
प्रदेश के पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन एवं जन्तु उद्यान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा0 अरूण कुमार सक्सेना ने प्रत्येक प्रदेशवासियों को पर्यावरणीय सेवाएं व प्रत्यक्ष लाभ उपलब्ध करवाने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे ईको पर्यटन विकास कार्यों में विभाग द्वारा किये जा रहे सहयोग व समन्वय हेतु विभागीय अधिकारियों एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों को बधाई देते हुए ईको पर्यटन के विकास की दिशा में किये जा रहे कार्यों की सराहना की। डा0 सक्सेना ने 10 फरवरी को लखनऊ पी0जी0आई0 स्थित लक्ष्मणपुरी ईको टूरिज्म रिजर्व के लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में तीव्र गति से बढ़ते शहरीकरण व औद्योगिकीकरण के फलस्वरूप सामान्य जन प्रकृति से दूर होता जा रहा है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति उदासीन होता जा रहा है। यह चिंता का विषय है। प्रदेश में विद्यमान समृद्ध जैवविविधता, आकर्षक वन्य प्राणियों स्थानीय प्रवासी पक्षियों के कलरव तथा राज्य जलीय जीव डाल्फिन की अठखेलियों के प्रत्यक्ष दर्शन के माध्यम से प्रत्येक प्रदेशवासी को प्रकृति की व्यवहारित शिक्षा देकर संरक्षण को जन संवेदना व जनभावना से जोड़ने हेतु ईको पर्यटन गतिविधियों को सरकार प्रोत्साहित कर रही है। वन मंत्री ने कहा कि प्रदेश में ईको पर्यटन गतिविधियों से आम जनमानस में पारिस्थिकी, वन्य प्राणियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशीलता व संरक्षण करने की भावना उत्पन्न हुई है। प्रदेश वासियों को गाइड, होमस्टे तथा पर्यटन गतिविधियों से जुड़े रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान की स्थापना, अंतरर्राष्ट्रीय महत्व के 09 नए वेटलैड्स को रामसर साइड्स के रूप से अधिसूचित किए जाने, ईको पर्यटन की दृष्टि से लगभग 50 स्थलों को विकास पर्यटन विभाग के सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों के योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है।
राज्य वन सेवा अधिवेशन हुआ संपन्न
लखनऊ के कुकरैल स्थित सभागार में पीएफएस एसोसिएशन का भव्य अधिवेशन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री माननीय डॉ. अरुण कुमार सक्सेना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अधिवेशन के दौरान पीएफएस अधिकारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रमुख मुद्दों में समयबद्ध रूप से पीएफएस अधिकारियों का आईएफएस कैडर में इंडक्शन, ग्रेडेशन-वरिष्ठता सूची का अद्यतन, चार वर्षों में डिप्टी डायरेक्टर पदोन्नति, कार्यकारिणी संचालन एवं अधिकारियों के स्थायीकरण शामिल रहे। अधिवेशन में वक्ताओं ने इन मुद्दों को प्रभावी रूप से उठाया और पीएफएस अधिकारियों के हितों की रक्षा एवं उनकी न्यायसंगत मांगों को पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि समय पर आईएफएस कैडर में इंडक्शन न होने से अधिकारियों के करियर ग्रोथ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, और ग्रेडेशन-वरिष्ठता सूची के अद्यतन में देरी से प्रशासनिक कार्यों में बाधा आती है। इसके अतिरिक्त, चार वर्षों में डिप्टी डायरेक्टर पद पर पदोन्नति की व्यवस्था से अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के अनुरूप दायित्व निभाने में सहूलियत मिलेगी। कार्यकारिणी संचालन को अधिक प्रभावी बनाने और अधिकारियों के स्थायीकरण के मुद्दे पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि इन सभी विषयों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, जिससे पीएफएस अधिकारियों को उनके अधिकारों और पदोन्नति के अवसरों का लाभ मिल सके।
इस वर्ष के वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियां शुरू
वन विभाग ने इस वर्ष आयोजित होने वाले वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियां शुरू दी हैं। इस संबंध में प्रदेश के पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन एवं जन्तु उद्यान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा0 अरूण कुमार सक्सेना ने कहा है कि वर्ष 2015 से वर्ष 2024 तक 4,07,186 हेक्टेअर भूमि पर वृक्षारोपण किया जा चुका है। इस वर्ष वन विभाग के लिए 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर 12.60 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य है। अन्य विभागों के लिए भी अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। व्यापक स्तर पर होने वाले वृक्षारोपण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली जायें। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण के लिए पौधशालाओं में उपयुक्त ऊँचाई के स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण पौध की उपलब्धता सुनिश्चित की जाय। अवैध कटान व अवैध शिकार में लिप्त असामाजिक, अवांछित, आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए तथा अवैध कटान व अवैध शिकार के प्रकरणों की संख्या शून्य की जाये। उन्होंने समस्त जिलों में इको पर्यटन के उपयुक्त विकास एवं पर्यवेक्षण के निर्देश दिये। बैठक में जनपदवार उपलब्ध कुल वन भूमि, प्रभागों में स्थापित कुल पौधशालाओं एवं उपलब्ध कुल पौध की संख्या, वृक्षारोपण स्थलों के भौतिक सत्यापन एवं अनुश्रवण ईकाईयों द्वारा किए गए सर्वेक्षण की प्रगति तथा पेड़ बचाओ अभियान योजना के अन्तर्गत की गयी कार्यावाही पर गहन चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त कैम्पा योजना के अन्तर्गत विगत पाँच वर्षों में विभाग को प्राप्त कुल भूमि एवं कराए गए कुल वृक्षारोपण, वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय राजमार्गों व मुख्य जनपदीय मार्गों पर किए गए वृक्षारोपणध् थीम प्लान्टेशन, वन्य जीव अपराधों में विगत 3 वर्षों में पंजीकृत मामले एवं उनका निस्तारण, विगत तीन वर्ष में अवैध कटान की स्थिति, ग्रीन बिल्डिग के निर्माण के सम्बन्ध में की गयी कार्यावाही एवं वन विभाग के अन्तर्गत दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन के सम्बन्ध में की गयी कार्यावाही सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विभागीय कार्यों की समीक्षा की गयी।
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